क्यू नही ?

हज़ारो के दिल जीतने वाला
अभी तक किसी का हुआ क्यूं नही ?
यूं सबके हसीन ख्वाब-ए-हसरत वाला
बना किसी इबादत की दुआ क्यूं नही ?
वो मुकम्मल शख्स फिरता है मुहब्बत के लिये
कोई अधुरा शख्स अभी तक उसका हुआ क्यूं नही ?
जो शख्स सिद्दत से निभाता रहा मोहब्बत की रश्मे
उस अजीज को उसका प्यार मिला क्यूं नही ?
कोई शख्स जब गिरा अपनो की ठोकर खा के
ना जाने फिर कभी वो उठा क्यूं नही ?
यूं हर जगह होता है मज़ाक उसके वजूद का
अगर है तो फिर आता खुदा क्यूं नही ?

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