नादान वादे !

कभी ख्वाबों की रेत से एक घर बनाया था
मैं था पागल और क्या खूब पागल बनाया था !!
नही समझा तकाज़े वक्त के हैं समंदर की लहरों से
मजबूरियों का असमां है बडा ख्वाहिश के परों से !
दे के खुशियों का चांद मैने फिर उसको घटाया था
मैं था पागल और क्या खूब पागल बानाया था !!
हथेली थाम कर उसकी करता था वादा साथ देने का
अंधेरों मे भी उसके लिये उजालों की बात करता था !
मैं खुद अधूरा तन्हा हूं मुझे कहाँ पता था
मैं पागल था और क्या खूब पागल बनाया था
कभी ख्वाबों के रेत से एक घर बनाया था !!
NADAANWADE

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किसी का तो अंत करो !

अंत ना हो संवेगो का
ना अंत हो भावनाओं का
तो फिर किसी का अंत करो
की हनन ना हो नारी का !!
एक मशवारा ये भी है की अंत करो अशिक्षा का
नारित्व जीवंत बने की ऐसा प्रबंध करो शिक्षा का
कानून सख्त हो उनके लिये जो पढे हुये ज़ाहिल हैं
दो सिघाशन उनको जो सच-मुच उसके कबिल हैं
हर बात पुरूष पे लागू हो ये भी है मतभेद बडा
कहीं ना कहीं नारी भी सोचे क्या है सही क्या गलत बडा !!

निर्भाया के अंतर्मन से “ज़िंदगी के अखिरी लम्हे “

मेरी उमंगो को सुलाया है किसी ने
मेरी तरंगो को दबाया है किसी ने
ये खुदा ! तू बता क्या ज़ुर्म किया था ??
मैंने भी संजोये थे कई सपने दिल मे
फिर भी मुझको कुछ ना मिला मिलके
काश ! वो रात होती ना
मेरी ज़िंदगी उस जगह सोती ना
मैं भी जीती गैरो की तरह
हुस्न मे वो आग गर होती ना !
फिर भी सपनो की खातिर मैंने मरना ना चाहा
मेरे सपनो ने मुझे हिम्मत से उठाना चाहा
मेरे सपनो मे ना थी हिम्मत की लड सके खुदा से
बस उसने कहा, चल अब तू जा इस जहाँ से
दुआ यही करुंगा फिर से आयेगी इस जहाँ मे
तू अखण्ड ज्योती से झायेगी इस जहाँ मे
बस ये बाते सुन कर सपनो की
मेरी अखिरी सांसे मुझे बोझ सी लगी
“बस छोड दी सांसे ये सोच कर
सोच बदल जायेगी मेरे जाने के बाद”

जग से नाते टूट गये
कई रिश्ते हम से छूट गये
हमने सोचा था एक नयी क्रांती आयेगी
पर हमे क्या पता था की हमको सब भूल गये
उम्मीद सिर्फ इतनी थी कि
आप हमको दिल मे याद रखोगे
जब भी सोचोगे तो एक ख्याल रखोगे
“की हम भी एक अच्छे व्यकितत्व मे हो
दमिनी जैसी बेटिया अस्तित्व मे हो
हर बेटी अडिग अस्तित्व मे हो”