कि सुबह फिर से आयी है !

बता दो बात जो जहन मे है कि सुबह फिर से आयी है,
तेरे चेहरे को देखू तो कुछ छुपा-छुपा सा लगता है !
नही पसंद मुझको है रहस्य इन इश्क के मोहल्लों मे,
ना जाने क्यू कोई शख्स खफा-खफा सा लगता है!!
कोई ज़रिया कोई उम्मीद दे दो कि सुबह फिर से आयी है,
बता दो बात जो जहन मे है कि सुबह फिर से आयी है,
आज कल आखों की बातें आखों से ना हो रही है,
क्या बात है मेरा प्यार बटा-बटा सा लगता है !!
बात जिसकी मेरे दिल को समा गयी,
वो आज ना जाने क्यू अमल मे बेवफा सा लगता है!
बता दो बात जो जहन मे है कि सुबह फिर से आयी है,
तेरे चेहरे को देखू तो कुछ छुपा-छुपा सा लगता है !!

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वो लडकी !

“मैं कभी भी उस जैसी लडकी से नही मिला. उसकी बडी-बडी आखें बिल्कुल जैसे सितारों का समंदर हो.जब कभी वो मुझ से बात करती तो मुझे ऐसा एहसास होता है कि मैं कायनात की सबसे नायाब और सबसे खूबसूरत प्राणी से बात कर रहा हूं.बदलों के गुच्छे से भी कोमल,किसी बच्चे की हंसी के तरह मासूम. वह बहोत टूट जाती है जब कभी जब बहोत तेज़ हंसती है तब उसके आंखों से बिल्कुल शुध्द पानी की बारिश गालो पर हो जाती है.उसकी उपमा हर कवि करता है और उसकी सुंदरता हर कविता मे समाहित है. शायद किसी रोज़ वो अपनी कीमत समझे,शायद कभी जान पाये कि वो दुनिया के लिये कितनी नायाब है क्यूकी वो उस तरीके की लडकियों की जैसी नही जिन्हे मैं प्रत्येक दिन सडकों मे देखा करता हूं वो तो वो लडकी है जिसके बारे मे मैं किताबों मे पढा करता हूं !!”

रूबरू-ए-ज़िंदगी !

सपने, ख्वाब, विजन,बडे असान दिखते हैं बंद आंखों मे लेकिन
जब ज़मीनी हक़ीक़त मे उतर जाते हैं तब ये उतने मुश्किल लगते हैं !!
तब हमें अपनों और अपने भरोसे की ज़रुरत होती है….
एक लम्हा रुक कर पल्कें मूंद कर दिल की अवाज़
सुनना ज़रुरी होता है और उम्मीद से ज्यादा सच्चाई पर भरोसा करना होता है !!
“ बहोत उतार चढाव हैं इस जिंदगी के सफर में….
इंसान समझ कर भी सफर का हमसफर नही बनता ” !!

नजरों की भाषा !

कोमल सा एह्सास मेरे दिल मे क्यू है आज
किसी ने देखा पहली बार ,
हाये किस अदा के साथ
फिर वो अंजान बनने की कोशिश …
फिर उसमे उनकी हार ,
फिर उसको छुपाने का उनका वो अंदाज़
बार बार उनकी हार, बार बार बडता प्यार !!kumarvishwas 037