नही अच्छा !

नही बदलोगे तुम मुझे ही बदलना है,
तेरे ये मसूम रुठने पर मेरा मुस्कराना नही अच्छा !
अब वक्त और दस्तूर वो नही जो पहले था,
ये कहू की मैं भी तुम जैसा हू तो या बहाना नही अच्छा !
अब सोचती हो तुम किसी और की होकर के की
मोह्ब्बत भी निभा लू तो,
यू होश मे रेहकर लडखडाना नही अच्छा !
दिल टूट ही जाये तो ही आराम है वर्ना,
अब वफा की रस्म निभाई तो जमाना नही अच्छा !
मज़बूरियों की मंजिले बन गयी दुनियां मे बे-हिसाब,
अब अपने प्यार का घर पुराना नही अच्छा !
चल खुदा हफिज़ तुझ को,
सात फेरों के वचन निभा अब तू,
यूं बच्चों की तरह ला-हासिल ख्वाब सज़ाना नही अच्छा !!

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