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तुम जैसा फिर ना मिला कोई मुझको ,
यू आके अपना सारा हाल बता देने वाला !
मेरे पास आके रोते थे तुम ….
जो था दीवारों की कैद मे रोने वाला !
हकीकत यही है और हकीकत कितनी कडवी है,
अब याद बन के रुलाता है हंसाने वाला !
जब देखता था उसे एक टक भरी महफिल मे…..
तब मना करके दुनिया के सबक सिखाने वाला !
बहोत याद आता है मुझे याद ना करने वाला !!
यू कभी दरमियां की दूरियां बहोत कम होती,
सरगोशियों भरी गरम सांसे जब सितम होती,
तब नज़ाकत से दामन छुडाने वाला !
कहाँ है मुझ को मोहब्बत सिखाने वाला !!
हकीकत यही है और हकीकत कितनी कडवी है,
अब याद बन के रुलाता है हंसाने वाला !!

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वो जा रहा वक्त एक्सप्रेस की ट्रेन पर……

वो जा रहा वक्त…..
एक्सप्रेस की रेल पर,
ज़िंदगी महज़ सफर करती है……
पैसेंज़र ट्रेन पर !
कोई ख्वाहिश का नज़ारा असमानो मे हो अगर,
बाहर खिडकी से ताकते हैं सब
यूं बैठ अपनी बर्थ पर !!
कुछ ज़िंदगियां बैठती सामने की शीट पे,
फिर तस्सवुर हसीन होते आंखो की कनकियों से !
वक्त का फिर ना कोई ख्याल होता है ,
हम धीमे है या तेज़ नही उसके जैसे …
फिर ना इसका कोई मलाल होता है !
वक्त तेज़ चले और तेज़ चले चाहें दौडे यूं ही ,
हम ज़िंदगी जी लेते हैं इन्ही हसीन लम्हों मे ही !
सफर यूं ही ज़िंदगी का चलता रहता है….
स्टेशन आते रहते हैं लोग बिछडते रहते हैं !
यू हार कर कभी ना इस रेल से उतर जाना ….
आओ हम सब देखते हैं ,
हम सब का मुकाम कहाँ कहाँ तक है !! train_19_edited1

क्यू नही ?

हज़ारो के दिल जीतने वाला
अभी तक किसी का हुआ क्यूं नही ?
यूं सबके हसीन ख्वाब-ए-हसरत वाला
बना किसी इबादत की दुआ क्यूं नही ?
वो मुकम्मल शख्स फिरता है मुहब्बत के लिये
कोई अधुरा शख्स अभी तक उसका हुआ क्यूं नही ?
जो शख्स सिद्दत से निभाता रहा मोहब्बत की रश्मे
उस अजीज को उसका प्यार मिला क्यूं नही ?
कोई शख्स जब गिरा अपनो की ठोकर खा के
ना जाने फिर कभी वो उठा क्यूं नही ?
यूं हर जगह होता है मज़ाक उसके वजूद का
अगर है तो फिर आता खुदा क्यूं नही ?

Valetine special <3

मेरी ज़िंदगी के हकदार तुम कहाँ होगे,
ए जाना जहाँ भी होगे खुश नसीब होगे,
ना आना लेके डर जब भी आना,
शहजादी बन के ,
गम से दूर खुशियों के तुम करीब होगे !!
बचना हज़ार जमाने की तोहमतों से तुम,
जी लेना तब तक सियानों की शर्तों पे तुम,
समझ के जीना इस अयिनो की दुनिया मे,
कुछ मगरूर लोग बडे अजीब होंगे !!
मेरी ज़िंदगी के हकदार तुम कहाँ होगे,
ए जाना जहाँ भी होगे खुश नसीब होगे !
जब कभी उदास शाम हो किसी की चाह मे,
तन्हा चल लेना खामोश किसी राह मे,
तमन्नायें थाम कर जावां होने का,
सलीका सीख लेना,
तुम्हारे बहकने के बहोत मुरीद होगें !!
मेरी ज़िंदगी के हकदार तुम कहाँ होगे,
ए जाना जहाँ भी होगे खुश नसीब होगे !! ❤

मेरा ख्याल तुमको

vlcsnap-2015-02-04-09h00m22s125मेरा ख्याल है तुम को तो कैसा ख्याल है तुमको,
मैं अच्छा हूँ या हूँ बुरा क्या ये सवाल है तुमको !
अगर ये कहोगे कि तुम पागल से लगते हो…..
तो मुसाफिर हूँ ना जाने किसका इंतजार है मुझ को !
बडी मुश्किल मे आखों से ख्वाबों को चुराया है,
अब खुद का हमसफर किताबों को बनाया है !
कभी मौका हो तो कुछ पल मेरे साथ गुजारो …….
ले चलेगें हसीन शायराना महौल मे तुमको !!
मेरा ख्याल है तुमको तो कैसा ख्याल है तुमको !
मैं अच्छा हूँ या हूँ बुरा क्या ये सवाल है तुमको !!
रास्तों मे हैं ख्वाहिशों के काफिले उतने ,
हैं दर्द मे आंशू और मोहब्बत मे दर्द जितने !
जितना पढा है उतने मे इतना ही जाना है …..
ख्वाहिशें तब ही रुकती है जब अपनी सांस को रोको !!
मेरा ख्याल है तुमको तो कैसा ख्याल है तुमको !
अगर ये कहोगे कि तुम पागल से लगते हो ……..
तो मुसाफिर हूँ ना जाने किसका इंतजार है मुझ को !!
कर्म स्वर्ग के कबिल नही सबके, हे! ईश्वर नरक से बचा हमको ,,,,,,

नादान वादे !

कभी ख्वाबों की रेत से एक घर बनाया था
मैं था पागल और क्या खूब पागल बनाया था !!
नही समझा तकाज़े वक्त के हैं समंदर की लहरों से
मजबूरियों का असमां है बडा ख्वाहिश के परों से !
दे के खुशियों का चांद मैने फिर उसको घटाया था
मैं था पागल और क्या खूब पागल बानाया था !!
हथेली थाम कर उसकी करता था वादा साथ देने का
अंधेरों मे भी उसके लिये उजालों की बात करता था !
मैं खुद अधूरा तन्हा हूं मुझे कहाँ पता था
मैं पागल था और क्या खूब पागल बनाया था
कभी ख्वाबों के रेत से एक घर बनाया था !!
NADAANWADE

किसी का तो अंत करो !

अंत ना हो संवेगो का
ना अंत हो भावनाओं का
तो फिर किसी का अंत करो
की हनन ना हो नारी का !!
एक मशवारा ये भी है की अंत करो अशिक्षा का
नारित्व जीवंत बने की ऐसा प्रबंध करो शिक्षा का
कानून सख्त हो उनके लिये जो पढे हुये ज़ाहिल हैं
दो सिघाशन उनको जो सच-मुच उसके कबिल हैं
हर बात पुरूष पे लागू हो ये भी है मतभेद बडा
कहीं ना कहीं नारी भी सोचे क्या है सही क्या गलत बडा !!